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हिमकेयर पर हाईकोर्ट सख्त, बजट का हवाला देकर इलाज का भुगतान नहीं रोका जा सकता

हाईकोर्ट ने कहा- फंड की कमी इलाज का भुगतान रोकने का आधार नहीं

हिमकेयर लाभार्थी के 2.70 लाख रुपये के क्लेम पर सरकार को राहत देने के निर्देश

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को अवमानना मामले में कारण बताओ नोटिस

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हिमकेयर योजना के तहत इलाज के खर्च के भुगतान को लेकर राज्य सरकार को कड़ा संदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार किसी योजना के तहत लाभ देने के लिए प्रतिबद्ध है और संबंधित विभाग भी मरीज के दावे को सही मान चुका है, तो केवल फंड या बजट की कमी का हवाला देकर भुगतान नहीं रोका जा सकता। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह याचिकाकर्ता के हक की राशि जारी करने के लिए हरसंभव प्रयास करे। इस मामले की सुनवाई मंगलवार को निर्धारित की गई है।

मामला सुरेंद्र कुमार से जुड़ा है, जो हिमकेयर योजना के लाभार्थी हैं। हृदय संबंधी गंभीर बीमारी के कारण उन्हें पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया था, जहां उनके दिल में कोरोनरी स्टेंट डाले गए। उपचार पर कुल 2.70 लाख रुपये का खर्च आया। हिमकेयर कार्डधारक होने के बावजूद अस्पताल को समय पर भुगतान नहीं मिलने के कारण उन्हें यह पूरी राशि अपनी जेब से चुकानी पड़ी।

याचिकाकर्ता ने कई बार भुगतान की मांग की, लेकिन राहत नहीं मिलने पर 12 दिसंबर 2025 को एचपी स्वास्थ्य बीमा योजना सोसायटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को कानूनी नोटिस भेजा। विभाग ने 2 फरवरी 2026 को अपने जवाब में स्वीकार किया कि 2.70 लाख रुपये का क्लेम पूरी तरह वैध है, लेकिन भुगतान न होने का कारण हिमकेयर योजना में फंड की अनुपलब्धता बताया। इसी आधार पर मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां अदालत ने सरकार के इस तर्क को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

अवमानना मामले में अधिकारियों को नोटिस

हाईकोर्ट ने एक अन्य मामले में भी स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने स्वास्थ्य विभाग की प्रधान सचिव, चिकित्सा शिक्षा निदेशक और स्वास्थ्य सेवा निदेशक को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि अदालत के आदेशों की अवहेलना के लिए उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए। यह मामला नर्सिंग संस्थान के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी करने में देरी से जुड़ा है। अदालत ने पहले ही तीन सप्ताह के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे, लेकिन कई महीने बीतने के बावजूद आदेश का पालन नहीं किया गया। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी।

सेवा विस्तार मामले में भी सुनवाई

एक अन्य मामले में सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सेवा विस्तार देने से जुड़े प्रकरण में राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अनुपालन हलफनामा दायर किया है। अदालत ने हलफनामे को रिकॉर्ड पर लेते हुए अगली सुनवाई 22 जुलाई तय की है। साथ ही आगामी आदेशों तक राज्य सरकार के पूर्व मुख्य सचिव को व्यक्तिगत पेशी से छूट प्रदान की गई है।